प्रश्नोत्तर P29-0034 · भाग 29
गुरु जी, क्या लोक कल्याण की कामना या भावना राग-द्वेष का रूप नहीं है?
नहीं। अगर लोक कल्याण में आपको सच में कुछ नहीं चाहिए, पूरा आंतरिक भाव है, तब राग-द्वेष नहीं हो सकता। और अगर उस लोक कल्याण के पीछे आपको कुछ चाहिए, तब राग-द्वेष हो जाएगा — मिलेगा तो राग, नहीं मिलेगा तो द्वेष। करने वाले को पता है; शुरुआत में उसे पता रहता है, और बाद में उसका काम बताने लगता है।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21