प्रश्नोत्तर P29-0037 · भाग 29
गुरु जी, आप अपना आसन, खटिया स्वयं उठाते हैं, बर्तन खुद मांजते हैं — साधकों से सेवा क्यों नहीं लेते?
अगर हम अपाहिज नहीं हैं और अपनी ही सेवा नहीं करेंगे तो कौन करेगा? कोई अपाहिज सेवा ले तो ठीक लगता है; जो सब कुछ शरीर सही होने के बाद दूसरों से सेवा ले रहा है, वो समाज के लिए क्या काम करेगा? वो अपाहिज ना होते हुए भी अपाहिज वाली जिंदगी जी रहा है। हम सेवा करने निकले हैं, करवाने नहीं। मैं जब निकला तो मेरा यही भाव था कि समाज के लिए मुझे कुछ करना है — करना है, करवाना नहीं। इसीलिए अपना आसन खुद उठाता हूं, बर्तन खुद मांजता हूं, भोजन भी बना लेता हूं। मैं तो सेवा करते-करते जाना चाहता हूं, सेवा लेते-लेते नहीं।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21