प्रश्नोत्तर P29-0093 · भाग 29
गुरु जी, आपने कभी काम वासना का अनुभव किया होगा — तो आप काम वासना के प्रश्न को नजरअंदाज क्यों करते हो?
जिसे आप काम वासना कह रहे हो, वह काम वासना है ही नहीं। वासना का मतलब होता है आप किसी भी काम को बेईमानी से कर रहे हो। शरीर की जरूरतें हैं — भोजन, शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — तो आप जरूरतों को वासना क्यों कहते हो? जरूरत है तो ईमानदारी से पूरा करो, नहीं तो छोड़ दो। मैं कितनी बार बता चुका हूं — काम भाव को काम वासना नहीं बोलते। पूरी सृष्टि में हर जीव के अंदर काम भाव उठता है, जरूरत पड़ने पर वे करते हैं; हमारे माता-पिता में काम भाव उठा, तभी तो हमारा जन्म हुआ। लोगों ने काम भाव को काम वासना का नाम देकर दिमाग में फिट कर दिया — यह गलत है। काम भाव बोलो, काम वासना ना बोलो; अगर है तो ईमानदारी से करो, नहीं तो छोड़ दो। बात खत्म।
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