प्रश्नोत्तर P29-0104 · भाग 29
गुरु जी, हम लाइन में नहीं लगना चाहते — मंदिर में भी पहचान से सीधे अंदर जाकर फटाफट दर्शन करना चाहते हैं। ऐसी साइकोलॉजी क्यों बन गई कि बस मेरा काम जल्दी हो जाए?
आगे जाना चाहते हो ना जल्दी — सब एक दूसरे को रौंद के आगे जाना चाहते हैं। और मोह तभी खत्म होगा जब लेने का भाव छोड़ के देने का भाव बनाओगे। जहां अपने तरीके से मिल रहा है, देखो उसी से आपको मोह है। आपके कई भाई हैं — एक भाई से लगाव है, एक से नहीं; क्यों? क्योंकि एक आपके तरीके से चल रहा है, एक नहीं चल रहा है। बस इतनी सी बात है। और जहां भी गए हो, वहां के नियम का पालन करो।
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वीडियो: #अहंकार से कैसे मुक्त हों ?| How to Dissolve the #Ego: The Path to #Spiritual #Freedom · 2026-05-13