प्रश्नोत्तर P29-0125 · भाग 29
प्रभु जी, मैं कहां से आया, क्या करने आया, कहां चला जाऊंगा — इसी बात का चिंतन करते हुए स्वयं की खोज, स्वरूप में स्थित होने की साधना ही ईमानदारी है, या यह ना करना बेईमानी है? मैं ऐसा समझता हूं, कृपया विस्तार से बताएं।
कर्म में — जब आपके द्वारा कर्म हो तो उसमें बेईमानी मत करना। छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — यह मत करना। बस दिखावा, बड़ा-छोटा बनने की इच्छा, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा मत करना।
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वीडियो: सत्संग प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग #aadhyatmik_satsang · 2024-10-02