आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P29-0127 · भाग 29

गुरु जी, आपके वीडियो बहुत समय से सुनता हूं, बहुत ज्ञान मिलता है। मेरी पूरी कोशिश रहती है कि ईमानदारी से जीवन जी पाऊं।

तो अभी भी कोशिश कर रहे हो? जीना चालू कर दो — बेईमानी छोड़ दो। बेईमानी छोड़ दो, ईमानदारी में जीने लगोगे। ईमानदारी तो आपको करनी नहीं है; ईमानदारी भी तुम मत करो, बस बेईमानी मत करो, बेईमानी करना बंद कर दो। ईमानदारी तो अपने आप होती है। इतना एहसान मत जताओ कि मैं ईमानदारी से जीता हूं — जीवन ही ईमानदारी का है; आपने ही बेईमानी कर ली, गलती आपने की है। आपके कर्म में ईमानदारी अपने आप होती है; बेईमानी के लिए प्लानिंग करनी पड़ती है, मेहनत करनी पड़ती है, अपनी समझ का उपयोग करना पड़ता है। बेईमानी कभी अनजाने में नहीं होती — जब भी हुई है, पूरी समझ, पूरे होश, पूरी जागृत स्थिति में होती है। और ईमानदारी तो अपने आप होती है, उसमें होश रखने की, जागृत स्थिति रखने की जरूरत भी नहीं है। इसलिए आप एक काम करो — कर्म में छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड, इसमें से एक भी मत करो; बस दिखावा मत करो, बात खत्म।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: सत्संग प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग #aadhyatmik_satsang · 2024-10-02