प्रश्नोत्तर P27-0159 · भाग 27
गुरु जी, जब चाहने की इच्छा बहुत प्रबल हो, तो क्या थोड़ा काम उसी इच्छा को पूरा करने में लगा दें, ताकि संपन्न होकर फिर अध्यात्म में ध्यान आसानी से लगे?
देखना यह है कि मेरी चाहत किसके लिए है — अपने लिए या किसी और के लिए? अगर किसी और के लिए है तो फिर क्यों आगे बढ़ना? क्या सच में वह जरूरत आपकी है, जिसके लिए आप काम कर रहे हो? सच में अपने लिए कर रहे हो? या मान के लिए चाहिए, सम्मान के लिए चाहिए? तो फिर क्यों करना — वही छोड़ देना। वह नहीं छोड़ता, आपको छोड़ना है।
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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30