प्रश्नोत्तर P27-0161 · भाग 27
गुरु जी, नेगेटिव विचार भी तो आते हैं — वे कहां से आते हैं, और खुद को उनसे अबाधित कैसे रखें?
नेगेटिव विचार आपके कर्म से आते हैं। आप नेगेटिव वाला काम मत करिए। विचार आ रहे हैं, आने दीजिए — आएगा और जाएगा, क्या फर्क पड़ता है? आप उस पर काम क्यों कर रहे हो? हमें विचारों से तकलीफ नहीं है; हम उन विचारों को नहीं चाहते जो हमें दुखी करते हैं। जितने अच्छे विचार हैं उन्हें आप लाना चाहते हो, और आपके विपरीत कुछ हुआ है तो उसे भूलना चाहते हो — क्यों? उसमें भी आप थे, इसमें भी आप हो। छोड़ना ही है तो सबको साथ में छोड़ो। विचार आपके किए गए कर्म ही तो हैं — निकलना क्यों चाहते हो? उसका सामना करिए, उसे आने दीजिए, उसे देखिए। जब आप कर रहे थे तब तो आप उसमें लिप्त थे; बंद करना था तो किया क्यों? अबोध में नहीं, समझ के किया — अबोध की तो याद ही नहीं रहती। पूरी तरह समझ के हम अपने आप को उलझाते हैं।
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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30