प्रश्नोत्तर P27-0162 · भाग 27
गुरु जी, किसी दूसरे के कर्म में भी हम अपने आप आ जाते हैं, खिंच जाते हैं — ऐसा क्यों?
आप खींचते हो ना — वह ऑटोमेटिकली नहीं होता। जैसे दूसरे का कोई झगड़ा चालू है, तो उसमें आपका नाम ऐसे नहीं आएगा; बिना किए आएगा ही नहीं — उसके पीछे कोई आधार है। आप कहीं ना कहीं उसमें लिप्त हैं, नहीं तो कोई भी आपका नाम नहीं लेगा। हम जितना भी कुछ करते हैं, समझ-समझ के अपने आप को फंसाते हैं — इसीलिए तो विचार आ रहे हैं। क्यों कर रहे हैं? छोटे समय की खुशी के लिए, क्षणिक सुख के लिए — हम बताना चाहते हैं कि मैं भी कुछ हूं। बस इतना बताना है कि मैं कुछ हूं।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30