प्रश्नोत्तर P27-0167 · भाग 27
गुरु जी, अगर किसी को कोई आदत — जैसे खाने की या ड्रिंक करने की — शुरू से इतनी प्रबल हो कि प्रयास करने पर भी नहीं छूटती, बल्कि और बढ़ती है, तो इन संस्कारों का क्या करें?
बस पक्का कर लें कि मुझे दिन में बस इतना खाना है, इससे ज्यादा नहीं। मजबूत व्यक्ति अपने पर अनुशासन करता है, कमजोर दूसरों पर। या तो आप उसके पास रहो जिसके आगे आपकी ना चले। ड्रिंक छोड़ने की क्या जरूरत है? पीना ही नहीं है, बस। भोजन उतना जितने में शरीर चल सके। नींद दायरे में मत लीजिए — तब उठिए जब आपकी नींद पूरी हो जाए। भोजन एक बार लीजिए — ना मांगना है, ना छोड़ना है, यह पक्का कर लीजिए। और अगर यह छूटे तो दूसरे दिन उसका आधा खाना है, अल्पाहार — अपने को यह दंड देना है। जैसे मोबाइल का, गाड़ी का एवरेज निकालते हो, अपना भी एवरेज निकालिए कि मुझे भोजन की कितनी जरूरत है।
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वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30