आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P27-0168 · भाग 27

गुरु जी, यहां बैठे 90% इंसानों की कोई ना कोई एक मूल चीज होती है जो वे नहीं छोड़ सकते — किसी का फोन पर कंट्रोल नहीं, किसी का जुबान पर, किसी का ड्रिंक या खाने पर। दस में से आठ चीजें अनुशासन से रुक जाती हैं, पर ये कुछ चीजें इतनी प्रबल क्यों हैं, और इनका क्या करें? मैंने महीनों अलग रहकर भी छोड़ा, पर फिर पलट कर आ जाती हैं।

पहले से आपकी आदत नहीं थी। उस आदत को बनाने वाला कौन है? स्वयं। तो आदत ताकतवर है कि स्वयं? अब उस आदत में आपको कोई रस मिल रहा है — बिना रस के तो आप करोगे नहीं। अब आपको देखना है कि वह मेरे जीवन के हित में है कि अहित में। अहित में है तो उसका त्याग करो — त्याग ही परम सुख है। और नहीं कर पा रहे हो तो ऐसे लोगों के साथ रहो जिनका स्तर आपसे ऊपर हो; वहां से आपको बल मिलेगा। जैसे एक आदमी बोझा नहीं उठा पाता, तो कोई मिलकर उसके सिर पर लाद देता है और वह आराम से ले जाता है — उठाने की ताकत नहीं थी, ले जाने की ताकत थी। आग की मात्रा ज्यादा है तो पानी भी बुझ जाएगा — ऊर्जा जिसकी ज्यादा है, साथ का असर वैसा होता है। मेरा तो कहना है — थूको तो चाटो मत, चाटना है तो थूको मत। छोड़ो तो पक्का छोड़ो; कोई जबरदस्ती तो आपके साथ नहीं करता। समझ के अपना पतन कर रहे हो तो उसके जिम्मेदार आप हो। आप में गिरने की ताकत है तो खड़ा होने की भी ताकत है — जिस तरीके से गिरे हो, उसी तरीके से खड़े भी हो सकते हो। सोच-समझ के जीवन को जियो, नहीं तो परिणाम के लिए तैयार रहो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: जीवन में आध्यात्म की जरूरत क्यों पड़ती है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30