प्रश्नोत्तर P28-0002 · भाग 28
गुरु जी, हम नाम जाप करते हैं — क्या यह उचित है?
नाम जाप जिसका भी कर रहे हो, उसका चरित्र भी अपनाओ। नाम जाप करिए, जो करना है करिए, लेकिन उसके साथ उसका चरित्र भी अपनाओ, आचरण भी बदलो, तब फायदा करेगा। जैसे आप दवा खाते हो तो परहेज भी बताया गया है; परहेज करते हो तब दवा काम करती है, परहेज न करो तो नहीं करेगी। वैसे ही आप कुछ भी अध्ययन कर रहे हो, मंत्र कर रहे हो, उसके साथ सत्कर्म भी करो। किसी को दिखावा मत करो, मान की इच्छा का त्याग कर दो, इज्जत पाने की इच्छा का त्याग कर दो, किसी को जलील करने या नीचा दिखाने की इच्छा का त्याग कर दो, बड़ा-छोटा का त्याग कर दो — सब एक जैसे हैं। जैसे लकड़ी, कॉपी, किताब, पेड़-पौधे सबको जला दो तो सब राख हो जाते हैं — अहंकार मिट गया तो सब एक हो गए। कुछ होना ही भटकाव है। अहम भाव को हटा दो, कुछ नहीं में हो जाओ और बिना इच्छा-अपेक्षा के सत्कर्म में लग जाओ।
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वीडियो: परमात्मा और मोक्ष कैसे पाये । / #परमात्मा #मोक्ष · 2023-12-04