प्रश्नोत्तर P29-0006 · भाग 29
गुरु जी, तृष्णा से मुक्त जीवन के लिए क्या करें?
तृष्णा मतलब प्यास। जैसे रेत में गर्मी से भाप निकलती है, तो हिरण को लगता है पानी की लहर है, पीने के लिए भागता है, लेकिन वहां कुछ नहीं मिलता और प्यास बढ़ जाती है — वही मृग तृष्णा है। इससे छूटने का एक ही उपाय है: "कुछ नहीं चाहिए" में आ जाओ।
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वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30