प्रश्नोत्तर P29-0015 · भाग 29
गुरुदेव, मैं अध्यापक हूं। साथी अध्यापक सांसारिकता में पूरे डूबे हुए हैं — उनको भी इस मार्ग पर लाने की इच्छा होती है। क्या प्रयास करूं या उन्हें उनकी नीति पर छोड़ दूं?
आप शिक्षक हैं तो विषय पढ़ाते हुए विद्यार्थियों को जीवन कैसे जिएं, लेनदेन कैसे करें, समाज में मानव की तरह कैसे जिएं — इसकी प्रेरणा दे सकते हैं, लेकिन ये नहीं कह सकते कि ये करो। आप खुद वो करते हुए अपनी सैलरी का कुछ उपयोग जरूरतमंद की सेवा में करिए — ठंड में कंबल-स्वेटर बांटो, भोजन बांटो, रविवार को सेवा करो; जितनी आपकी क्षमता है उतना, अधिकार से ज्यादा नहीं। साथी अध्यापकों के लिए आप अपनी तरफ से प्रयास करेंगे तो राग-द्वेष हो जाएगा। हो सके तो सत्संग का वीडियो दे सकते हैं; उनके अहंकार को जरा उठाइए — कहिए, "यार, मैं बहुत समय से सुन रहा हूं, समझ में नहीं आ रहा, आप जरा सुन के बताओ ये कहना क्या चाहते हैं।" तब वो बड़े ध्यान से सुनेगा, क्योंकि उसे बताना है।
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वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30