आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P29-0016 · भाग 29

गुरु जी, जब प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है, तो कृष्ण जी ने यह क्यों कहा कि जो हमारी शरण में आता है उसे मैं माफ कर देता हूं?

शरण तक वही पहुंचता है जो प्रारब्ध भोग लेता है। यही तो बात है — बिना भोगे पहुंच ही नहीं पाएगा। युधिष्ठिर तो उनके साथ थे, बहुत लोग उनके साथ थे — क्यों नहीं बचा लिए? शरणागत का मतलब ऐसा नहीं है। उनकी शरण, जहां राग-द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, मेरा और कर्ता का भाव ना हो — यह नहीं है, तब आप शरणागत होगे। यह है शरणागत का मतलब।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: भाव, गुण और लक्षण में भेद क्या है ?#yogijikasatsang #आध्यात्मिकप्रत्यक्षज्ञान #प्रत्यक्षज्ञान · 2026-05-30