प्रश्नोत्तर P29-0056 · भाग 29
गुरु जी, अगर हम ही कर्ता हैं, तो सब गुरु लोग कर्ता-भाव को छोड़ने की बात क्यों करते हैं?
कर्ता में जो अहम भाव है, वह हटा दो। कर्ता तो तुम ही हो। अगर कर्ता नहीं होते तो इतने महापुरुष क्यों बोलते कि निर्विकार होने के लिए प्रयास करो — प्रयास में भी तो कर्ता आ रहा है। कर्ता भी तुम ही, धर्ता भी तुम; कर्ता का अहम भाव छोड़ दो, बस खत्म।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21