प्रश्नोत्तर P29-0057 · भाग 29
गुरुदेव, आदमी विचारों में फंस जाता है — बाहर कैसे निकले?
वह विचारों में नहीं फंसा है, कामनाओं में फंसा है; कामनाओं की वजह से विचारों में फंस जाता है। जैसे हम कहते हैं मैं अपने मोबाइल को, कंप्यूटर को, गाड़ी को बहुत मानती हूं — लेकिन गाड़ी खराब हो जाती है तो कचरे में फेंक देते हैं; कपड़े जिन पर दाग ना लगने देते थे, एक दिन कचरे में फेंक देते हैं। हम अपनी जरूरत को मानते हैं, लेकिन सीधा नहीं कहते कि जरूरत की वजह से मानते हैं; उसके पीछे शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श — कुछ मिल रहा है, तब हम उसको मानते हैं। वैसे ही हम विचारों में नहीं, कामनाओं में फंसे हैं, और बता रहे हैं कि विचारों में फंसे हैं।
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वीडियो: गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का क्या कर्तव्य है शिष्य के प्रति / #योगीजी_का_सत्संग #गुरु #पूर्णिमा · 2024-07-21