प्रश्नोत्तर P29-0091 · भाग 29
गुरु जी, क्रोध ऐसा होता है कि काम करते-करते अपने आप ही निकल जाता है, फिर बाद में अफसोस होता है कि क्यों कर दिया — क्या करें?
देखना यह है कि क्रोध किसलिए किया — सामने वाले के हित के लिए, उसके कल्याण के लिए, या अपने स्वार्थ के लिए? अफसोस हुआ तो मतलब गलत किया। तुम्हारी जरूरत समय पर वह पूरी नहीं कर रहा, इसलिए उस पर क्रोध कर रहे हो — तो वह क्रोध हमेशा पछतावा देता है। तुम्हारा क्रोध किसी को दबा रहा है, नीचा दिखा रहा है, या उठा रहा है? अगर किसी को उठा रहा है तो तुम्हारा भी स्तर उठेगा, उसका भी; और गिरा रहा है तो तुम भी गिरोगे, वह भी गिरेगा — हां, समझदार होगा तो तुम्हारे क्रोध से मजबूत होगा। तो उस समय होश में रहना है, ध्यान रखना है; देखना है कि मेरे क्रोध का कारण क्या है, वजह क्या है — और समझदारी से, मत करो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: 27 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-10-20