प्रश्नोत्तर P29-0098 · भाग 29
गुरु जी, ईमानदारी से काम कराने में आदमी को कष्ट तो जरूर होता है?
होता ही होता है; ऐसा नहीं है कि नहीं होता। कराना पड़ता है। मैंने किया है, मेरे साथ हुआ है — मैंने कहा नहीं, पैसे तो नहीं दूंगा, किसी भी तरीके से नहीं। उसमें समाज के लोग जिम्मेदार हैं, खुद लोग जिम्मेदार हैं। घर में कार खड़ी है और जाके ₹1 वाला अनाज ला रहे हैं, लाइन में खड़े हैं — तो शर्म की बात नहीं है क्या? नहीं लेना चाहिए; वो जरूरतमंद के लिए आया है। ये भी बेईमानी है, ये भी योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा है। और इसकी भरपाई घुमा-फिरा के आप ही करोगे, आपकी पीढ़ी करेगी।
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वीडियो: #अहंकार से कैसे मुक्त हों ?| How to Dissolve the #Ego: The Path to #Spiritual #Freedom · 2026-05-13