प्रश्नोत्तर P29-0097 · भाग 29
गुरु जी, आजकल एक घर खरीदना हो तो बिना रिश्वत दिए रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता। ऐसी व्यवस्था में ईमानदारी से कैसे जिएं?
तो करो ना, लेकिन आत्मज्ञान का ख्वाब मत देखो। आप खूब बेईमानी करो ना, रोक कौन रहा है? आप खूब घर बनाओ ना, एक नहीं हजार घर बनाओ — लेकिन फिर आत्मज्ञान का ख्वाब क्यों देख रहे हो? बाबा तो बस आत्म कल्याण के लिए मार्ग बता सकते हैं, और आत्म कल्याण के लिए इतने नियम का पालन करना पड़ेगा। करना है तो इधर आ जाओ, नहीं करना है तो उधर जाओ। बाबा यहां जंगल में बैठे हैं कि कैसे आपका आत्मिक कल्याण हो जाए, उसके लिए मार्ग बताने। जो लोग भी अपना कल्याण करने के लिए मार्ग खोज रहे हैं कि मैं राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा से कैसे मुक्त होके अपनी मूल स्थिति, अपने स्व में पहुंच जाऊं — उनके लिए मैं मार्ग बताने बैठा हूं, व्यवस्था नहीं। क्योंकि मैं उससे निकला हूं। अगर आपको निकलना है तो पहली लाइन आपको पकड़नी पड़ेगी — ईमानदारी मुक्ति है। इसे बिना पकड़े आपका आत्मिक कल्याण नहीं हो सकता; और अगर नहीं पकड़ पाओगे तो आत्मिक कल्याण के सपने मत देखो, जाओ अपने जीवन में मस्त रहो। मैं भी इसी दुनिया में जीता हूं — 13 साल के ऊपर हो गया, एक कपड़े में रहता हूं। हम नहीं लेंगे फ्लैट, हम झोपड़ी में रहेंगे, लेकिन हम जिएंगे। 40-50 साल पहले झोपड़ी में ही जिंदगी थी। आप सोसाइटी मेंटेन करने के चक्कर में फंस गए, अपना लेवल मैच कर रहे हो, सब स्टेटस में फंसे हैं — तो गलती किसकी है? अपनी गलती। आप गवर्नमेंट को दोष दे रहे हो, अपनी गलती नहीं देख रहे हो। हमसे आकर कोई भी बेईमानी नहीं करवाता है; हमने फैलाव इतना कर दिया है कि बेईमानी करनी पड़ रही है।
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