प्रश्नोत्तर P29-0113 · भाग 29
गुरु जी, जब भगवान की प्राप्ति हो जाती है तो फिर महापुरुषों में अलग-अलग उपाधि क्यों होती है — जैसे हंस, परमहंस, स्वामी, श्री 108, सद्गुरु? इनमें क्या अंतर है?
यह सब एक ही है, कोई अंतर नहीं है। महात्मा का मतलब होता है महान आत्मा — जो अपने आत्म में स्थिर हो गया। हंस उसे बोला गया है जिसमें क्षमता होती है कि दूध और पानी को अलग कर दे — दूध को पी ले, पानी को छोड़ दे। तो परमहंस उसे कहते हैं जो अज्ञान और ज्ञान को अलग-अलग कर दे; आपको दिखा दे कि आप कहां फंसे हो और कैसे निकलना है, वो ज्ञान बता दे, आपको आपसे मिलने का मार्ग बता दे — वो परमहंस। स्वामी — जो स्वयं का हो गया, अपना खुद का मालिक हो गया। बस ऐसे ही नाम दे दिए गए हैं; आप चाहे महात्मा कहो, चाहे परमहंस कहो, एक ही मतलब हुआ। ये सब बाहर समझने के लिए है, बाकी इनके पीछे कुछ नहीं है।
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