प्रश्नोत्तर P29-0123 · भाग 29
गुरु जी, दूसरे देश भौतिकता में समृद्ध होते जा रहे हैं, जबकि हमारा देश पहले उनसे ज्यादा समृद्ध था। हमारे देश में ऐसा क्या हो जाए जिससे विदेशों में हमारा मान और भी बढ़े? और आज नशे का शिकार ज्यादा लोग हो गए हैं, इसका क्या हो सकता है?
ईमानदारी — एकदम सीधी सी ईमानदारी। यह हमारी ताकत है। बेईमानी की वजह से हम बुजदिल हो गए, नहीं तो हमारा देश एकदम संपन्न देश है। मैं खुद देखा हूं — जिस एरिया को आप लोग गरीब बोलते हैं, वो 200-300 का गुटखा रोज खा के थूक देते हैं; मैं खुद घूम के देखा हूं, झोपड़ी वालों की बात कर रहा हूं। ये देश गरीब नहीं है, ये बना हुआ गरीब है; इसे लोगों ने गरीब-गरीब बोलना चालू किया। मुझे 13 साल से इस देश में गांव-गांव घूमते हो गया — इस देश में कोई कमी नहीं है। बस मैं तो कह रहा हूं कि ईमानदारी हो जाए, बात खत्म — ईमानदारी और सत्कर्म। देश भी मजबूत, आप भी मजबूत; आप मजबूत तो देश मजबूत — एक दूसरे के पूरक हैं।
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