प्रश्नोत्तर P29-0135 · भाग 29
गुरु जी, एक दिन घर में लेटकर चिंतन कर रही थी तो बचपन की बहुत दर्दनाक बात पूरी सामने आ गई, फिर उसका मनन हुआ और अब वह याद आती है तो कुछ नहीं लगता। तो क्या लेटकर चिंतन ठीक नहीं?
मैंने कहा ना कि लेटकर मत करो, नहीं तो वह आराम होता है। फिर अपनी आदत बिगड़ जाएगी, फिर होश भी नहीं रहेगा। धीरे-धीरे आदत बिगड़ जाएगी। काम को अगर काम के तरीके से करोगे तो परिणाम अच्छा आएगा, और काम को काम के तरीके से नहीं करोगे तो परिणाम इधर-उधर आएगा। इसलिए मेरा कहना है लोगों को कि जवानी में भजन कर लो। 60 के बाद शरीर रोग का घर हो जाता है; जहां पर जवानी जिया है उसी का चिंतन होगा। अगर जवानी आपने भजन में बिताई तब आपका कल्याण हो जाएगा। अपनी जिम्मेदारी निभाओ, पढ़ाई करो, काम करो, सब करो, लेकिन साल में एक महीना सिर्फ अपने आप को दो — यह मेरा युवाओं को संदेश है।
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