प्रश्नोत्तर P29-0134 · भाग 29
गुरु जी, कोई साधक घर में रहकर ही आत्मिक चिंतन कर ले, तो क्या उससे काम नहीं चलेगा?
आत्मिक चिंतन कर लिया, ठीक है, लेकिन तुम्हारे पास अगर निकलने की ऊर्जा ही नहीं है तो चिंतन करके क्या करोगे? सिर्फ चिंतन करने से कोई राजगद्दी पा जाएगा? राजगद्दी तक पाने के लिए उसे काम करना पड़ेगा। कुछ पाना है तो उसके लिए काम करना पड़ेगा। चिंतन तब, जब हम इस शरीर के द्वारा सेवा देते हैं — चाहे धन सेवा, चाहे तन सेवा, चाहे समझ की सेवा। उसके बाद हम चिंतन करते हैं तो यह ऊर्जा, जब हम कहीं सेवा दिए रहते हैं, सत्कर्म किए रहते हैं, तो कई गुना आती है और मुझे निकालने में मदद करती है। निकलने के लिए तो ऊर्जा चाहिए। जीवन में कुछ किया ही नहीं, अब चलने की ताकत नहीं है और कह रहे हो मैं आत्मिक चिंतन से पहुंच जाऊं — यह असंभव है।
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