प्रश्नोत्तर P29-0182 · भाग 29
गुरु जी, यह संशय लगातार बना हुआ है — आम धारणा है कि आम जनमानस भगवान का साक्षात्कार नहीं कर सकता, क्योंकि पुराने जन्मों का प्रारब्ध होता है, कोई बिरला ही भगवान तक पहुंच पाता है।
यह कैसे तय किया जाए कि कौन आम आदमी है, कौन नहीं? पहुंचने के पहले सब आम आदमी थे। जितने भी महापुरुष आज गिने जाते हैं, उनके अतीत में जाओगे तो साधारण थे — कालिदास को महामूर्ख तक कह दिया गया। कोई जन्म तो आखिरी होगा, और उन करोड़ों में आप भी एक हो सकते हो। अगर आपमें भाव उठ रहा है कि मैं मिल सकता हूं, इसका मतलब मिलने की क्षमता है; आप वही पढ़ पाते हो जो आपके अंदर है। पर पहले अपने आप से सच में पूछो कि मुझे जाना कहां है, और पता पूछो तो ईमानदारी से पूछो, किसी को नीचा दिखाने या टाइम पास के लिए प्रश्न मत करो। जितने लोग उस परम ब्रह्म तक पहुंचे, वो पहले पूरी तरह निर्विकार हुए — राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा से मुक्त हुए। तो अपने आप को इनसे मुक्त कराने का मार्ग पूछो। धारणा, ध्यान, समाधि, तुम ब्रह्म — पहले निर्विकार होने की धारणा पक्की करो, उस पर ध्यान घटित होगा, धीरे-धीरे वह समाधि तक अपने आप ले जाएगा।
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वीडियो: यह संशय है क्या आम जनमानस भगवान का साक्षात्कार कर सकता है / #भगवान #साक्षात्कार · 2023-12-28