प्रश्नोत्तर P29-0188 · भाग 29
गुरु जी, कहते हैं ध्यान की अवस्था से आदमी निर्विकल्प समाधि में पहुंच जाए तो उसके साथ कुछ ऐसा घटता है कि वह हर चीज से बिल्कुल अलग हो जाता है। यह निर्विकल्प क्या है?
राग-द्वेष छोड़ने के लिए ध्यान घटित होता है। जैसे ही छोड़ने का भाव बनता है, धारणा होती है और ध्यान घटित हो जाता है। जब पूरी तरह छूट जाता है तब वह अपने आप में हो जाता है — प्रवृत्ति से मुक्त होकर निवृत्ति में निवृत्त हो गया। वहां कुछ भी नहीं होता — ना सुख, ना दुख, ना राग, ना द्वेष, ना मोह, आसक्ति, ना इच्छा, ना अपेक्षा। वह अपने आप को पाता है, अपने आप से उसका मिलना हो जाता है — निर्विकार हो गया।
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वीडियो: यह संशय है क्या आम जनमानस भगवान का साक्षात्कार कर सकता है / #भगवान #साक्षात्कार · 2023-12-28