आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P29-0190 · भाग 29

गुरु जी, जो अच्छा लगता है वह तो मैं धारण कर लेता हूं, पर जो मन को नहीं भाता उधर से ध्यान हट जाता है और बोरियत महसूस होती है। मन कहां भाग रहा है?

जो जिसे चाहिए उसका मन उसी में लगता है। जैसे एक आदमी शराब पीता हो, एक नहीं पीता — बोतल खोल दो, एक कहेगा क्या खुशबू है, एक कहेगा क्या दुर्गंध है। शराब तो एक ही है। जो जिसे चाहिए वह प्रिय लगता है, नहीं चाहिए तो अप्रिय लगता है। और यह मार्ग प्रिय-अप्रिय से परे है — सत्य से मिलना है, सच-झूठ से हटना है, यहां भाने और ना भाने की कोई बात ही नहीं। क्योंकि अब तो मुझे अपने आप से मिलना है; मैं सबसे मिल-मिलकर थक गया, बाहर कुछ भी नहीं है।

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वीडियो: यह संशय है क्या आम जनमानस भगवान का साक्षात्कार कर सकता है / #भगवान #साक्षात्कार · 2023-12-28