प्रश्नोत्तर P30-0040 · भाग 30
महाराज जी, इतनी ठंड में भी आप गीले कपड़े पहन लेते हो, उसी में नहाकर चले आते हो। ठंड का एहसास नहीं होता? ऐसा क्यों करते हैं?
ये तो मुझे 13 साल के ऊपर हो गए, इसी में नहाना, इसी में रहना। ठंड का एहसास होता है, लेकिन अपने को काम करना है। धूप में कपड़ा सुखाओ चाहे शरीर पे सुखाओ — मेरा समय बचता है, नहीं तो उतना समय कपड़े को देना पड़ेगा। अगर मैं अभी यहां से उठूं तो जिस दिशा में चाहूं चला जाऊं, मुझे पीछे नहीं जाना होगा, क्योंकि मेरे पास यही एक कपड़ा है। दूसरा कपड़ा होता तो पीछे जाकर लाना पड़ता, और छूट जाता तो लगता मेरा कपड़ा छूट गया। मैं पूरी तरह वर्तमान में जीना चाहता हूं, इसलिए एक कपड़ा। कुटिया खोलनी नहीं होगी क्योंकि उसमें मेरा ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं पूरी तरह अपने आप में होके जीना चाहता हूं — यहां बैठा हूं तो पूरी तरह बैठा हूं, पूरा प्रेजेंट।
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वीडियो: #अहंकार से कैसे मुक्त हों ?| How to Dissolve the #Ego: The Path to #Spiritual #Freedom · 2026-05-13