आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान

प्रश्नोत्तर P30-0141 · भाग 30

गुरुदेव जी, मैं एक-दो घंटे के लिए (अपनों की कुटिया) आ सकता हूं क्या? रोहतास, पानीपत।

आ सकते हो, लेकिन जरूरी नहीं कि मैं मिलूंगा। आप ये मत समझना कि आप आओगे तो हम मिलेंगे। अगर बाहर रहेंगे तो मिलना होगा, नहीं तो आप अपनी कुटिया में आत्मिक चिंतन करना, चले जाना। क्योंकि अदलपुरा में मैं एक साल तक — कोई भी व्यक्ति आया, चाहे वह रात को 2:00 बजे आया — मैं सबसे मिला। लेकिन उसके बाद मैंने बोला, भाई अब मेरी मर्जी। अपनों की कुटिया में व्यवस्था है, साधना करो — आप एक घंटा रहो, चाहे जब तक रहो, यहां के नियम में रहो। मिल भी सकता हूं, नहीं भी मिल सकता हूं; अगर मैं बाहर रहूंगा और मेरा भाव रहेगा, तो मिलना होगा, कुछ बातें होंगी, कुछ सत्संग होगा; नहीं तो नहीं होगा। आप आ सकते हो, स्वतंत्र हो; लेकिन आने के बाद किसी की स्वतंत्रता छीनना मत। यह सब बातें ना करना कि मैं तो बहुत दूर से आया, मुझे मिलाओ — दूर से आया तो क्या एहसान किया? यहां के किसी की स्वतंत्रता भंग ना करना। आप आओ स्वतंत्र हो, आप जाओ स्वतंत्र हो। हम अपनी स्वतंत्रता तो ठीक रखते हैं, लेकिन दूसरों की स्वतंत्रता में दखल देते हैं। भैया, सबका जीवन है, सब अपनी-अपनी स्वतंत्रता से जीना चाहते हैं, जीने दो। आपको देखना है कि आपको क्या करना है — मेरा जन्म किस लिए हुआ है, मैं किस लिए आया हूं, मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है — ये सब समझते हुए जीवन में आगे बढ़ो, अपना आत्मिक कल्याण करो।

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वीडियो: 40 सुबह अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट #योगी · 2026-11-02