प्रश्नोत्तर P30-0171 · भाग 30
गुरु जी, जब हम पूर्ण से अपूर्ण में आ गए — और एक नहीं, पूरी दुनिया के अस्सी प्रतिशत लोग आ गए — क्या सबको ऐसा लगा कि अपूर्ण की तरफ खजाना बंट रहा है?
हां, बंट रहा है ना, तभी लगे हैं ना खजाने में तो उलझ गए। खजाना मिल भी रहा है, लेकिन उस खजाने का मजा कोई और ले रहा है, तुम नहीं। तुम्हें लग रहा है मैं लूंगा; ना, कोई और ले रहा है। तुम तो बस देने और लेने में लगे हो, उसमें ईमानदारी-बेईमानी में आप लगे हो। आप दे रहे हो तो भी कहीं जा रहा है, आप ले रहे हो तो भी कहीं जा रहा है। तुम सिर्फ निमित्त हो, लेकिन तुमने अपने आप को कर्ता मान लिया।
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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24