प्रश्नोत्तर P30-0176 · भाग 30
गुरु जी, सेवक कैसे बनें? मार्गदर्शन करें।
बस कुछ नहीं चाहिए — आ जाओ सेवक। जब तक कुछ चाहिए, तब तक आप मालिक, ये ध्यान रखना। और अपने तरीके से चाहिए, तो फिर राजसी या तामसी, दो में से एक प्रवृत्ति धारण करोगे, तो आप लालची हो जाओगे — तुम मालिक भी नहीं, सेवक भी नहीं रहे। लालच का त्याग करना है; लालच का त्याग तब होगा जब योग्यता से ज्यादा चाहिए का त्याग करोगे। लालची आदमी भूखे जानवर जैसा — उसका खुद का कोई अस्तित्व नहीं होता, कहीं भी मुंह मार देता है। अध्यात्म लालच से मुक्त होने के लिए यात्रा है। लालचपन हटाओगे तब मालिकपन में आओगे; फिर आपको कोई मिलेगा जो रगड़ेगा, बताएगा मालिक एक है दो नहीं, तब मालिकपन का भाव छूटेगा, तब आप सेवकपन में आओगे। उसी के लिए साधना है, उसी के लिए साधक बनना पड़ता है। लालच को छुड़ा लोगे, पूरी तरह निर्विकार हो जाओगे, तो आत्म ज्ञान होगा; आत्म ज्ञान हो जाएगा तो फिर आप वही सेवक भाव में आ गए।
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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24