प्रश्नोत्तर P30-0195 · भाग 30
गुरु जी, जब आत्मा अपनी मूल स्थिति में पहुंचती है, तब क्या वह आत्मा कहलाती है?
हां, अपने मूल में; फिर वहां से परमात्मा की यात्रा शुरुआत होती है। अभी तो हम लोग अपने आप को इस भवसागर से, जिसका आदि-अंत नहीं, निकालने के लिए काम कर रहे हैं — इच्छा-अपेक्षा से मुक्त कराने के लिए साधना कर रहे हैं। अभी परमात्मा की यात्रा थोड़ी ना हो रही है; वो तब होगी जब हम छुड़ा लेंगे, उसके बाद अपने आप शुरुआत होगी, वहां कोई प्रयास आपको नहीं करना होगा। गर्भ धारण के बाद मां-बाप बनने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जाता; गर्भ धारण तक के लिए प्रयास किया जाता है। वैसे ही निर्विकार अपने आप को कराने के लिए प्रयास करना पड़ेगा; जब वो अपने मूल स्थिति में आ जाता है, तो उसकी यात्रा अपने आप चलती है, वहां प्रार्थना भी नहीं बचेगी। एक समय ऐसा आएगा कि उसका एकाकार हो जाएगा; वो प्रयास से मुक्त हो जाता है।
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वीडियो: सेवक के अंदर पाए जानें वाले गुण और धर्म कौन से हैं ? #livesatsang #aadhyatmik_satsang #gyan · 2024-12-24