प्रश्नोत्तर P1-0055 · भाग 1
गुरु जी, कार्यक्षेत्र में कोई बेमतलब कुछ बोलकर चला जाता है, तो भीतर ही भीतर बेचैनी और घुटन होने लगती है। इससे कैसे बचें?
यही तो बात है — देखना है कि कहीं न कहीं आप कमजोर हो, इसलिए वह ऐसे बोल रहा है। अपने आप को मजबूत बनाओ। जब आप कमजोर बनकर काम करते हो — चाहे आर्थिक, चाहे शारीरिक, चाहे मानसिक — तो लोग आपको कुछ भी बेमतलब बोलकर चले जाएंगे। तो सामर्थ्यवान बनिए, यह बहुत जरूरी है। सामर्थ्यवान बनकर कार्य करेंगे तो कोई बोलने से पहले सोचेगा, क्योंकि उसे पता है कि यह व्यक्ति जवाब देगा, और अच्छे तरीके से देगा।
देखिए, आलपुरा में भी मैंने सामर्थ्यवान होकर कार्य किया, तभी कर पाया; और यहां भी सामर्थ्यवान होकर कार्य करने आया, तभी कर पा रहा हूं। सामर्थ्यवान होकर काम करोगे तो फटाफट काम होगा और कोई बोलेगा भी नहीं। अगर कोई बोल रहा है, तो इसका मतलब कहीं न कहीं आप कमजोर हो। अपनी कमजोरी को दूर करो।
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