प्रश्नोत्तर P1-0059 · भाग 1
गुरु जी, आप कहते हैं चिंतन करना है, चिंता नहीं। क्या चिंतन से भी मुक्त होना है?
हां। चिंतन से तब मुक्त होंगे जब अपने आप को निकाल लोगे। राग, द्वेष, मोह, आसक्ति, इच्छा, अपेक्षा, ‘मेरा’ और कर्ता के भाव से अगर आप मुक्त हो गए, तो चिंतन से भी मुक्त हो जाओगे।
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