आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P1-0090 · भाग 1

लेकिन योगी जी, अध्यात्म में भी ‘काउंटर’ बहुत हैं — बहुत आश्रम हैं, बहुत प्रतिस्पर्धा है। कहीं जाओ तो उनके नियम में रहो, उनकी माला रटो, तिलक लगाओ, बड़ की 11-21 परिक्रमा करो — पैर दुखने लगते हैं, पर कुछ अनुभव नहीं होता। बहुत जिंदगी ऐसे ही ट्राई एंड टेस्ट में निकल गई। तो क्या बार-बार ऐसे ही ट्राई एंड टेस्ट करती रहूं?

आप कितनी बार उसी को ट्राई एंड टेस्ट करोगे? एक बार करने के बाद आगे निकलो ना, बार-बार उसी को मत करो। ऐसे तो जाना ही पड़ेगा, एक-एक को छांटना पड़ेगा। देखना यह है कि आप एक के पास कितनी देर रुकते हो, और क्यों रुके हो — वहां कुछ हो भी रहा है या नहीं। मैं अपनी एक घटना बताता हूं, आप इससे कुछ सीख सकते हो। जब मैं खोज में था, एक माता जी ने कहा कि आप ओंकारेश्वर के एक आश्रम जाओ, वे आपको बताएंगे। मैं गया तो वे व्यक्ति नहीं थे। कोठारी ने कहा कि भोजन करना है तो खाकर सो जाओ। मैंने पूछा, वे कब आएंगे? बोले, नहीं पता। मैंने कहा, जब वे हैं ही नहीं और कब आएंगे यह भी नहीं पता, तो मैं यहां रात क्यों गुजारूं? मुझे खोज करनी है, और यहां मेरी खोज रुक गई है। तो मैंने उस आश्रम में न खाया, न सोया; मैं ठंड के महीने में रात भर नर्मदा तट पर बिना बिस्तर के रहा। अगर मैं वहां रात बिता लेता — वे आते भी नहीं, जवाब भी नहीं मिलता — तो इसका मतलब मैं खोजी नहीं हूं, कहीं न कहीं भोगी हूं, अपने शरीर को सुरक्षा दे रहा हूं। मेरे कपड़ों की हालत देखकर और सामान न होने से, पैसे होने के बाद भी मुझे कोई कमरा नहीं देता था, तो रातें तट पर गुजारनी पड़ती थीं। एक रात मैं इतना कांप रहा था कि हिम्मत छूट गई; गणपति मंदिर में मूर्ति के पीछे टाइल्स पर जाकर सोया, पर डर था कि सुबह पुजारी आकर उल्टा-सीधा बोलेगा। फिर एक होटल गया, कहा पैसे दूंगा, आईडी भी है — बोला लगेज कहां है? कमरा नहीं दिया। रात भर तड़प-तड़पकर इंतजार करता रहा कि कब सूरज उगेगा, कब धूप होगी। तो कहने का मतलब — आप कितने तत्पर हो। एक-एक को छांटना पड़ेगा। आप जहां हो, वहीं से चलो; लोग मिलते जाएंगे, छूटते जाएंगे। देखना यह है कि आप जिसके लिए गए हो, वही बात करते हो या समय बर्बाद कर रहे हो। मैंने जब संन्यासी जीवन अपनाया, तो तीन दिन ही आश्रम में रहा और फैसला ले लिया; उसी आश्रम में लोग 30 साल बाद भी फैसला नहीं ले पा रहे। आपको यह देखना है कि जिस उद्देश्य से गए हो, क्या उसकी पूर्ति हो रही है। हो रही है तो रुको, नहीं तो आगे जाओ।

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वीडियो: क्या सोशल मीडिया के द्वारा सब कुछ जाना जा सकता है ? #योगी · 2026-10-13