प्रश्नोत्तर P1-0140 · भाग 1
गुरु जी, पता नहीं चलता कि मैं किस-किस से निकल चुका हूं, किससे निकल रहा हूं, और मैं कहां हूं।
यह धीरे-धीरे आत्मिक चिंतन करेगा, या दूर जाएगा, तो पता चलेगा। जैसे अब यहां आया है, तो देख कौन सी याद तुझे खींच रही है। मुझे वापस क्यों जाना है? अगर मैं आगे जा रहा हूं, तो मुझे पीछे जाना क्यों पड़ रहा है? तो पीछे जरूर मैं कहीं घुसा हूं।
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