प्रश्नोत्तर P10-0007 · भाग 10
घर में दबाव रहता है। यह करना है, वह करना है। अपने जीवन का निर्णय खुद नहीं ले सकते। घुटन हो रही है, इसलिए मैं मौन हूं। क्या दबाव में हम कभी आगे नहीं बढ़ सकते? फिर क्या उन लोगों से लड़ना चाहिए, क्योंकि वे समझ नहीं सकते, तमोगुण ऊर्जा वाले हैं? मैंने उनसे मानसिक रूप से दूर बना लिया है, लेकिन उनकी गलत बात नहीं मानता।
घुटन क्यों हो रहा है? मौन नहीं हो। जबरदस्ती तुम दबाए जा रहे हो। तुम कमजोर हो। इसे मौन नहीं बोलते। करोगे क्या? तुम जवाब नहीं दे पा रहे हो, तो चुप हो। डर के नाते चुप हो। सामर्थ्यवान बनो। आगे बढ़ो। ऐसा नहीं कि मौन हो तो आप बहुत हो गए। अब आप जवाब ही नहीं दे सकते। जब जवाब दोगे तो लतियाए जाओगे, मारे जाओगे। आपकी हिम्मत नहीं है। तुम मौन नहीं होते, डर से चुप होते हो।
अब ऐसे मत समझना। आपने प्रयास किया, यह कह नहीं रहे। अब कोई बात नहीं, मैं आप पर छोड़ देता हूं। प्रयास क्यों किया फिर? प्रयास किए। अब तुम हार गए हो। तो मजबूर हो गए हो। अपनी मजबूरी को महानता का नाम मत दो कि मैं मौन हो गया हूं। यह मौन नहीं है। पिटाई के डर से मौन हो। पहले सामर्थ्यवान बनो।
दूर नहीं बना लिए हो। अगर आप ज्यादा बोलोगे तो पीटेंगे। पिटाई के डर से आप बोलते नहीं हो। सामर्थ्यवान बनो। जवाब देना है तो सामर्थ्यवान बन के दो। अब बोलोगे क्या? बोल दोगे तो पिटाओगे।
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