प्रश्नोत्तर P10-0166 · भाग 10
गुरुदेव, अगर कोई छल-कपट से मुक्ति के लिए प्रयास कर रहा है, तो क्या उसे सांसारिक चीजें छोड़नी हैं? मेरा लाइफ स्टाइल बिल्कुल अलग है — मैं दोस्तों के साथ भी रहता हूं, सिनेमा भी देखता हूं। क्या यह गलत है?
आप किसी के साथ रहो, चाहे सिनेमा देखो, पिक्चर देखो, किताबें पढ़ो, भ्रमण करो — आप कुछ भी देख रहे हो तो उससे कुछ सीख सकते हो। फिल्मों में भी चरित्र दिखाया जाता है, एक अच्छे का, एक बुरे का; आप उससे भी बहुत कुछ सीख सकते हो। एक ही घटना में दो बात घटती है, अच्छा और बुरा; आप क्या सीखते हो, वह देखो। बस ईमानदारी अपना लो, सत्कर्म अपना लो, बेईमानी का त्याग करो। आप कहीं भी घूम सकते हो, किसी के साथ जा सकते हो; बस उसमें ईमानदार रहो, किसी का साथ बेईमानी से मत करो। आप जैसे हो, उसे बता दो; अगर वह स्वीकार करता है तो उसका साथ ठीक है, नहीं तो बोल दो — मैं ऐसा हूं, और हूं तो हूं। क्योंकि मेरी समझ, मेरा कर्म ही मुझे लेके जाएगा; एक दिन यह साथ छोड़ के ही जाना पड़ेगा।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 8 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-08