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प्रश्नोत्तर P10-0183 · भाग 10

गुरुदेव, माया के जगत में रहकर, माया से संयुक्त होकर मुक्ति कैसे संभव है? तीन लोक में जो भी दृश्यमान है, वह सब माया है। तो क्या आत्मसंयम, ईमानदारी — ये सब भी सांसारिक वस्तुएं हैं?

माया में रह के ही माया को छोड़ना है। अगर आप संसार को माया मान रहे हो, तो इसी माया में लोग आनंद में भी रहे। बस तुम अपने तरीके का त्याग कर दो। बात खत्म।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 8 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-08