आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P11-0049 · भाग 11

(कुटिया में साधक) हमें पता नहीं कि आत्मज्ञान, निर्वाण, मोक्ष क्या है। आत्मज्ञान से हमें क्या हासिल होगा, और उसके बाद जीवन कैसा होगा? सरल भाषा में बताइए।

आत्मज्ञान से जितना हासिल है, सब खत्म हो जाएगा — मानसिक; क्योंकि हमारे पास जो कुछ भी है, उस पर मानसिक बंधन है। इतना पक्का पता है कि जिसे मैं भोग रहा हूं, उसे पहले किसी और ने भोगा है, बाद में कोई और भोगेगा, चाहे यह शरीर तक। तो हमें कुछ मिलने वाला नहीं है। हमने दूसरे के चक्कर में आकर अपने आप को खो दिया; अब मुझे खुद "मैं" चाहिए। व्याकुलता, घुटन, बेचैनी, राग, द्वेष, मोह, आसक्ति — ये किसी के कारण हैं; कर्म तुम्हारे द्वारा हुआ, लेकिन जिस तरीके से किया वह गलत था, उससे राग-द्वेष हो गया — वहीं से अपने आप को छुड़ाना है। आत्मज्ञान में आपको आपके अलावा कुछ नहीं मिलने वाला। आप अकेले हो जाओगे, भीड़ में रहकर भी अकेले रहोगे, क्योंकि भीड़ तभी तक अच्छी लगती है जब तक हम रसपान करते हैं; आत्मज्ञान की तरफ बढ़ने वाला जिंदा लाश हो जाता है, आपके पास कुछ नहीं रहेगा। (और उस दिन मैंने आपसे इसलिए बात नहीं की, क्योंकि एकांत में घुटन के समय किसी से बात कर लोगे तो वहां से वापस आ जाओगे और सारी मेहनत खत्म हो जाएगी; उस समय आपको आपकी जरूरत है।)

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: 18 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-18