प्रश्नोत्तर P11-0150 · भाग 11
पहले गुरु ज्ञान देने से पहले शिष्य से 12 साल सेवा करवाते थे; आज गुरुओं ने लंगर लगा रखा है, कहते हैं पहले ज्ञान ले लो, सेवा बाद में कर लेना। इसमें क्या अंतर है?
कहानी है (सच भी हो सकती है, झूठ भी) कि जब कलियुग आया, तो उसने कहा — मुझमें अवगुण अनेक हैं, पर एक गुण है: हर युग में हजारों साल तपस्या के बाद आपसे मिलना होता था, मेरे युग में घड़ी-आधी घड़ी में मिलना हो जाएगा; और मैं इतनी व्यवस्था दे दूंगा कि लोग सोच भी नहीं सकते। पहले नदी, कुएं से पानी लाने में घंटों लगते थे, अब हर रूम में नल है; टंकी भरी तो खुद बताती है कि मोटर बंद करो; संजय को महाभारत में जो आंख मिली थी, आज सबके हाथ में है। इतनी सुविधा के बावजूद लोग कहेंगे टाइम ही नहीं है, जबकि टाइम ही टाइम रहेगा। पहले वाल्मीकि को दीमक लग जाती थी, आज मच्छर काट ले तो साधना छोड़ मच्छर भगाते हैं — सहनशक्ति नहीं है। और आज कल्याण की बातें भी रसपान बन गई हैं — जहां थे वहां मजा नहीं आ रहा, तो अध्यात्म ले लिया; शब्दों को ले रहे हो, जी नहीं रहे; मान के चक्कर में आंख बंद करके बैठ गए, नाम के ध्यानी, नाम के ज्ञानी बन गए।
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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11