प्रश्नोत्तर P12-0118 · भाग 12
तो क्या मैं इस बात को ऐसे समझूं कि जो भी मेरे साथ अभी हो रहा है, वो कभी ना कभी मैंने ही डिमांड किया था, और वही डिमांड आज पूरी की जा रही है? और जब वो मेरे सामने आता है तो मैं वहां भी गड़बड़ हो जाती हूं।
तो उसकी भरपाई करनी पड़ेगी ना, उसका दोष लगेगा ना, क्योंकि आपने किसी का समय बर्बाद किया। वो डिमांड पूरी करने में कितने लोग लगे — ऐसे थोड़ी ना आपकी डिमांड पूरी हो गई; कितनी बाहरी-आंतरिक शक्तियां लगीं। एक आदमी नहीं, कितने लोग लगते हैं तब जाकर आपकी एक डिमांड पूरी होती है। आप एक रोटी खा रहे हो — एक रोटी आते-आते कितने लोगों का हाथ लगा है! आप मिलने जाओ तो मिल नहीं पाओगे; किसकी जमीन होगी, कौन बोने वाला होगा, आप खोज ही नहीं सकते। रोटी वाले को खोज लोगे, फिर उसने गेहूं कहां से डाला, बीज कहां से लाया — आखिरी तक जाते-जाते खत्म। शुरुआत में भी कुछ नहीं, आखिरी में भी कुछ नहीं।
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वीडियो: बिना हिसाब के तू जा नहीं पाएगा #योगी · 2026-09-17