प्रश्नोत्तर P12-0123 · भाग 12
चंडीगढ़ से एक प्रोफेसर ने फोन किया कि उनके एक नजदीकी रिश्तेदार की मृत्यु के बाद कोई डिप्रेशन का शिकार है, और वो उसे योगी जी के सामने लाना चाहती हैं कि योगी जी की दृष्टि उस पर पड़ेगी तो वो शायद बाहर आ जाएगी। क्या ऐसा होता है?
अब उस प्रोफेसर ने मेरे ज्ञान का उपयोग किया होगा, कुछ समझा होगा; उसे कुछ समझ में आया तो एक को और लाना चाहती है। तो अब देखना है कि योगी जी के लिए उसने क्या किया? योगी जी के काम का तो उपयोग किया — तो तूने क्या किया? वो क्यों दृष्टि डालेगा? क्या तूने उसकी भरपाई की? जिसकी दृष्टि तू डलवाना चाहती है, वो दृष्टि इस शरीर के द्वारा, आंख के द्वारा डालेगा — तो इसको भी तो कुछ लगता होगा, उसके लिए क्या सोचा? अगर आज इस शरीर से, मुखारविंद से शब्द निकल रहा है, तो इस शरीर में पोषण है तभी निकल रहा है; शरीर की ऊर्जा एकदम खत्म हो जाए तो क्या एक शब्द भी निकलेगा? तो जिस शरीर के द्वारा आप ले रहे हो, उस शरीर को क्या दिया? पहले तो यह कहना चाहिए कि योगी जी के द्वारा मुझे बहुत लाभ हुआ, और मेरी ताकत यह है — धन से, तन से, समझ से; मेरी इनकम यह है, सेविंग यह है, इतने में से आपकी जितनी जरूरत हो ले लो। क्योंकि मेरे पास यह ताकत थी तो भी मैं दुखी थी, आज खुश हुई तो उनकी ताकत से; तो मेरी ताकत उनके काम आ जाए — ये होना चाहिए। लाई-चुपड़ी मीठी-मीठी बातों से कुछ होने वाला नहीं है। देने में जितना लेट करोगे, उतना ज्यादा भरना पड़ेगा, और ऊपर से दंड अलग लगेगा कि समय पर दिया क्यों नहीं। इसलिए उपयोग करते ही पूछ लो — भैया, मैं क्या करूं?
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: बिना हिसाब के तू जा नहीं पाएगा #योगी · 2026-09-17