आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P12-0142 · भाग 12

(एक साधक) गुरु जी, इस मार्ग पर लाखों-करोड़ों चलते हैं पर पहुंचता कोई एक है — मैं वही एक होना चाहता हूं।

वही देखो, एक होने के लिए बलिदान कितना देना पड़ता है। लाखों-करोड़ों में एकाध पहुंचता है — कौन पहुंचता है? जो कुछ भी कर सकता है और पीछे मुड़कर नहीं देखता, यहां तक कि अपने जीवन को भी दांव पर लगा देता है, वह पहुंचता है लक्ष्य तक। कोई एक कदम में वापस आ जाता है, कोई कुछ कदम में, कोई एक दिन, कोई एक-दो साल में; लेकिन जो पूरी तरह लगा रहा, जिसने पीछे देखा ही नहीं, वही पहुंचेगा। इस मार्ग में चलने वालों की गिनती नहीं की जा सकती, लेकिन पहुंचने वाले उंगलियों पर गिने जाते हैं। पहले जितने लोग जुड़े हैं, जितना कुछ जुड़ा है, उसका बलिदान देना है; फिर अपना बलिदान आपको देना पड़ेगा — ऐसी परीक्षा होगी कि ये जीवन तू दांव पर लगाएगा कि नहीं, उस समय तुम्हारी चालाकी काम नहीं करेगी। उसमें पास हो गए तो एक समय आएगा कि आपके पास कुछ नहीं रहेगा, और उसमें भी बड़े ऑप्शन आएंगे — जेब में फूटी कौड़ी नहीं होगी, तब लोग आएंगे कि ले आश्रम, गद्दी खाली है, पकवान लेकर खड़े होंगे कि तू गद्दी स्वीकार कर। हर तरफ घर दिखेगा पर किसी घर में मेरी एंट्री नहीं, सब आराम से सो रहे हैं पर तुम्हारे पास बिस्तर नहीं, जहां सो रहे हो वहां से हटा दिया जाएगा। आखिर में इतनी भयानक स्थिति बनती है कि लगता है इससे अच्छा मरना ठीक था — वो रोता है, चिल्लाता है, गिड़गिड़ाता है, सुनने वाला कोई नहीं; इच्छा भी नहीं रही, ना मार्ग रहा ना लक्ष्य, ना पागल हो पा रहा, ना मौत आ रही। ये स्थिति तब बनती है जब वह जीवन और मृत्यु को पार करता है। मैं उसमें जीकर आपको बता रहा हूं, मैंने उसमें जिया है। और वहां केवल तुम रहोगे और एक गुरु रहेगा। राम सीते-सीते कहकर पेड़-पौधों से पूछ रहे थे और उनके त्रिकालदर्शी गुरु वशिष्ठ सब देख रहे थे पर बता नहीं सकते थे, क्योंकि बता दें तो वो आगे नहीं बढ़ पाएगा, उसकी समझ वहीं रुक जाएगी। गुरु लाचार नहीं है — वो तुम्हें लाचारी से मुक्त करना चाहता है, तुम्हें बैसाखी नहीं देना चाहता; तुम्हें तड़पते हुए देखता है पर कुछ करेगा नहीं, क्योंकि तुम्हें पार कराना चाहता है। गुरु के पास उत्तर है पर नहीं देगा — अब तू उत्तर खोजने लायक बन, इसको मेरे सामने पार कर, तब मैं बेफिक्र हो जाऊं कि तू भवसागर पार कर लेगा। आप कोई साधारण इच्छा नहीं रख रहे कि मुझे परमानंद को उपलब्ध होना है, तो साधारण काम भी नहीं होगा — असाधारण होगा, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। तो तैयार रहिए, या फिर ये इच्छा छोड़ दो।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: बेफिक्र होना चाहता हूं, मैं तेरी तरफ से... #योगी · 2026-08-21