प्रश्नोत्तर P12-0159 · भाग 12
पहले मैं ध्यान यहां-वहां सब लगाता था। अब बस बैठा रहता हूं, तो पैर पूरा सुन्न हो जाता है, कान में गुंजन सुनाई देता है — ये अनुभव मैं देखता नहीं, पर होते हैं। इनका क्या?
अलग तरीके से बैठो, कुर्सी पर बैठ जाओ। ये अनुभव, क्रिया — ये सब छोड़ना है, इन पर कुछ ध्यान नहीं देना है; जो हो रहा है, होने दो, होने दो। सत्कर्म करो, अपने आप को सेवा में लगा दो। बंधन कहां से हुआ है? कर्मों से; तो कर्मों से ही छुटकारा पा सकते हो। जो कर सकते हो वो करो — ईमानदारी मुक्ति है, बेईमानी बंधन है। बेईमानी करके हम फंसे हैं, ईमानदारी करके मुक्त हो सकते हैं — यही आखिरी, सबसे मूल बात है।
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वीडियो: कोई रास्ता दिखाओ... #योगी · 2026-07-12