आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0035 · भाग 13

गुरु जी, आपके ज्ञान से समझ लगी है कि अध्यात्म का मार्ग क्या है, कैसे अपने आप को तारना है, कैसे बंधनों से आजाद होंगे। तो आप ऐसी कृपा भी करें कि हम इन बंधनों से छूट जाएं।

कृपा ही तो है — इतने नजदीक आ गए। अब इस कृपा को अपनाकर तुझे निकलना है ना। कृपा तो हो ही गई, तभी तो इतने नजदीक आ रहे हो; लेकिन तू दूर मत हो। सामने अब कुछ खड़ा न हो — न मान का चक्कर, न लोभ का चक्कर, न बड़ा बनने का चक्कर। बस अब निकल जा। जिस उद्देश्य को लेकर जन्म लिया है, उस पर काम कर ले। मार्ग भी मिल गया है, समझ भी काम कर रही है; अब तुझे पूरी तरह काम करना है। और काम तब कर लेगा, जब मान और लोभ के चक्कर में नहीं पड़ेगा। मान को खड़ा मत होने देना, लोभ को खड़ा मत होने देना। ऐसा नहीं है कि खड़े नहीं होंगे — खड़े होंगे, लेकिन इन्हें पहलू मत देना।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: प्रत्यक्ष ज्ञान का डमरू दमोपुर शिव मंदिर में · 2026-09-04