आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P13-0037 · भाग 13

गुरु जी, मेरे में कमी है।

बस — समय और ज्ञान बहुत कम लोगों को मिलता है; समय भी है, समझ भी है, ज्ञान भी मिल गया, अब कुछ बचा नहीं है। बस ज्ञान को धारण करना है। ज्ञान को धारण कर लिया, तो इसका मतलब गुरु को धारण किया। गुरु शरीर नहीं है, गुरु ज्ञान का प्रतीक है। पूरी पृथ्वी पर पानी एक ही जगह से आता है, दो जगह से नहीं — निमित्त अनेक होते हैं, लेकिन स्रोत एक ही है। वैसे ही भिन्न-भिन्न शरीरों से ज्ञान आता है, लेकिन उसके पीछे गुरु एक ही है; गुरु कभी दो नहीं होता। जिस शरीर से ज्ञान निकल रहा है, उसका मैं सम्मान करूंगा, लेकिन धारण गुरु को करूंगा। अगर मैंने ज्ञान को धारण कर लिया, तो गुरु को धारण कर लिया, और अब मैं निकल जाऊंगा — अब मुझे कोई रोक नहीं सकता। इसमें गुरु की कृपा भी होती है — गुरु ने ज्ञान दे दिया, यही कृपा है।

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