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प्रश्नोत्तर P13-0153 · भाग 13

ऐसा ही कुछ कुत्तों के साथ भी हुआ। मैं बाहर के कुत्तों को खिलाता था; फिर उनकी आबादी बढ़ी, पैसा कम पड़ा, तो मैं उन्हें इग्नोर करने लगा। जानवरों को खिलाते हैं तो आनंद की प्राप्ति होती है।

कुछ क्षण के लिए। देखो, मैं वही कह रहा हूं — मुझे ये देखना है कि क्या मैं उसके लिए उसको खिला रहा हूं, या अपने शौक को पूरा कर रहा हूं। मैं अगर किसी को लाया हूं तो क्यों लाया हूं? किसी को कुछ खिला रहा हूं तो क्यों खिला रहा हूं — उसकी जरूरत में, या मेरा शौक है, मेरी मन की इच्छा है, मैं अपना दिल बहला रहा हूं? लेकिन कब तक बहलाओगे? एक दिन ऊब जाओगे। अगर उसकी जरूरत के लिए उसको खिला रहे हो, तब तो कभी नहीं ऊबोगे। लेकिन अपना शौक पूरा कर रहे हो, अपनी इच्छाएं पूरी कर रहे हो, तो एक दिन वही घुटन का कारण बनेगा। मुझे यह देखना है कि मैं किसके लिए किसके पास जा रहा हूं — उसकी जरूरत के लिए या मेरी जरूरत के लिए। जैसे आप लोग यहां हो, तो मैं आपके लिए यहां हूं, अपने लिए यहां नहीं हूं। मुझे जब जरूरत थी तो मैंने 12 साल भ्रमण किया। मैं आपके लिए यहां हूं, तो चाहे जितने लोग आ जाएं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा; लेकिन अगर मैं अपने लिए यहां होता, तो कभी ना कभी मुझे आप लोगों से घुटन होने लगती। मैं कुछ कर रहा हूं तो किसके लिए कर रहा हूं — उनके लिए कि अपने लिए? अगर उनके लिए कर रहे हो तब तो आपका स्तर उठता जाएगा; अगर अपने लिए कर रहे हो तो आपका स्तर गिरता जाएगा, और कभी वही घुटन देगा। गृहस्थ जीवन में यही तो होता है — जीते हैं अपने लिए, बताते हैं उसके लिए; और बाद में सवाल उठता है कि तुमने मेरे लिए क्या किया। सब एक दूसरे को नोच रहे हैं और बता रहे हैं कि हम तुम्हारे लिए जी रहे हैं। एक ही जगह घुटन नहीं है — गुरु के पास, क्योंकि वो तुम्हारे लिए है और मुक्त है।

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वीडियो: किसकी जरूरत में मैं कर रहा हूं #योगी · 2026-08-14