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प्रश्नोत्तर P13-0177 · भाग 13

गुरु जी, वैराग्य क्या है?

राग-द्वेष से मुक्त होने के लिए जब भाव जगता है, तो उसे वैराग्य कहते हैं। वैराग्य मतलब इस संसार से अलग होना। संसार मतलब — लालच, मान की इच्छा, दिखावा, ज्यादा पाने की इच्छा — ये है संसार। परमात्मा की सृष्टि में तो आनंद है; तुम्हारी सृष्टि में गड़बड़ है। तुम्हारी सृष्टि का निर्माण हुआ है मान से, दिखावा से, योग्यता से ज्यादा पाने के चक्कर में, बड़ा बनने के चक्कर में — बस इतनी सी बात है। इतने में आपकी सृष्टि का निर्माण हुआ है, और उस सृष्टि में दुख ही दुख है।

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वीडियो: बिना सूचना के परिचितों के बीच में...! #yogijikasatsang · 2025-06-25