प्रश्नोत्तर P13-0200 · भाग 13
गुरु जी, किसी वस्तु या मनुष्य का चिंतन करते हैं तो उसके गुण अपने में आ जाते हैं?
नहीं, ऐसा नहीं। उसके लिए आपको काम भी करना पड़ेगा। अपने गुरुदेव का चिंतन किया तो उसके लिए काम करना पड़ेगा। चिंतन करने से थोड़ी ना हो जाएगा — चिंतन करने से कोई राजा बन जाएगा? उसके लिए कर्म भी होना चाहिए ना; चिंतन के बाद कर्म भी तो होना चाहिए। भृंगी नाम का कीड़ा होता है — वो एक बिल बनाता है, उसमें कीड़े को लाके रखता है, ध्वनि करता रहता है, करता रहता है; बाद में वो कीड़ा उसके जैसा हो जाता है। हर कीड़े को नहीं लाता — जो उसकी तरफ सीधा हो जाता है, उसी को लाता है। इसमें गुरु-शिष्य का उदाहरण दिया गया है कि गुरु फूंक मार-मार के अपने जैसा बना देता है। गुरु भी उसी शिष्य को पकड़ता है जो गुरु के मत को ग्रहण करता है — गुरु भी उसी को डंक मारता है। इसलिए तो मैं कह रहा हूं, गुरु डंक मारता रहता है।
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